380 पहले जैसी ही हमारी सोच हम मुसलमान नहीं बदली पुरानी विचारधारा, अफगानिस्तान में फिर खून-खराबा और क्रूरता दिखने वाली है जैसा दुनिया 1996 से 2001 के बीच देख चुकी है,खुद तालिबान ने साफ कर दिया है कि उनकी सोच अब भी वही है जैसी 1990 के दशक में थी :तालिबान-CRIME BHASKSR NEWS .COM-EDITOR UMESH SHUKLA


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ANI-काबुल17.08.2021

        

       अफगानिस्तान | टोलो न्यूज के मुताबिक तालिबानी प्रवक्ता ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर कहा, ''तालिबान महिलाओं को इस्लाम के आधार पर अधिकार देने को प्रतिबद्ध है। महिलाएं हेल्थ सेक्टर और दूसरे सेक्टर में काम कर सकती हैं, जहां उनकी जरूरत है। महिलाओं के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं होगा।''तालिबानी प्रवक्ता ने पाकिस्तान के इरादों पर पानी फेरने के भी संकेत दिए और कहा कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी और देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। मुजाहिद ने कहा, ''हम अपने पड़ोसियों और क्षेत्रीय देशों को भरोसा देना चाहते हैं कि हम अपनी जमीन का इस्तेमाल दुनिया में किसी देश के खिलाफ नहीं होने देंगे। हम विश्व समुदाय को भी आश्वासन देते हैं कि हम इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि आपको हमारी जमीन से कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।''    तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद से टोलो न्यूज पर एक इंटरव्यू में पूछा गया कि 1990 के दशक के तालिबान और आज के तालिबान में कितना अंतर है? प्रवक्ता ने कहा, ''विचारधारा और मान्यताएं वही हैं, क्योंकि हम मुस्लिम हैं। लेकिन अनुभव के मामले में बदलाव है। हम अब अधिक अनुभवी हैं और एक अलग परिप्रेक्ष्य है।

                          काबुल में अधिकतर देशों के दूतावासों पर लटकते तालों के बीच जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि उनका संगठन विदेशी दूतावासों की सुरक्षा करेगा और इनके कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। मुजाहिद ने कहा, ''काबुल में दूतावासों की सुरक्षा हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हम सभी देशों को भरोसा देना चाहेंगे कि हमारे सुरक्षाबल सभी दूतावासों, मिशनों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और सहायता देने वाली एजेंसियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।''अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बीच पाकिस्तान सहित उसके कई समर्थक यह कहकर विद्रोही गुट को मान्यता दिलाने की मुहिम में जुटे हैं कि वे अब बदल चुके हैं। हालांकि, खुद तालिबान ने साफ कर दिया है कि उनकी सोच अब भी वही है जैसी 1990 के दशक में थी। तालिबान के इस रुख से साफ है कि अफगानिस्तान में एक बार फिर उसी तरह का खून-खराबा और क्रूरता दिखने वाली है जैसा दुनिया 1996 से 2001 के बीच देख चुकी है।

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